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इन्सेफलाइटिस: एक बेड पर 3 बच्चे, जमीन पर लेटे परिजन, एक समय में सिर्फ 3 डॉक्टर, कैसे होगा इलाज?

इन्सेफलाइटिस: एक बेड पर 3 बच्चे, जमीन पर लेटे परिजन, एक समय में सिर्फ 3 डॉक्टर, कैसे होगा इलाज?


बिहार में अक्यूट इन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के चलते होने वाली मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मुजफ्फरपुर में आज 4 और बच्चों की मौत हो गई। अस्पताल में संसाधनों की कमी के चलते स्थिति भयावह होती जा रही है।

हाइलाइट्स

  • बिहार के मुजफ्फरपुर में अक्यूट इन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के चलते अब तक 108 बच्चों की मौत हो चुकी है
  • इन्सेफलाइटिस के मरीजों की संख्या बढ़ने से अस्पताल में पांव तक रखने की जगह नहीं, अफरा-तफरी का माहौल
  • एक बेड में तीन-तीन मरीजों का हो रहा इलाज, परिजन जमीन पर और 100 से ज्यादा मरीजों के लिए सिर्फ 3 डॉक्टर

मुजफ्फरपुर
बिहार के मुजफ्फरपुर में अक्यूट इन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के चलते अब तक 108 बच्चों की मौत हो चुकी है। बीमारी के चरम पर पहुंचने के करीब 3 हफ्ते बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुजफ्फरपुर का दौरा किया। उनके दौरे के दौरान श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज व अस्पताल (एचकेएमसीएच) के बाहर परिजनों और स्थानीय लोगों ने जमकर हंगामा भी किया। इस दौरान नीतीश मुर्दाबाद और वापस जाओ के नारे भी लगे। मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार कहे जाने वाले एईएस से लगातार हो रही मौत से व्यवस्था चरमरा गई है। इस वक्त मुजफ्फरपुर के एचकेएमसीएच में इस घातक बीमारी के सबसे ज्यादा मरीज भर्ती हैं। यहां 300 से ज्यादा मरीजों का इलाज चल रहा है। मरीजों की संख्या बढ़ने से अस्पताल में पांव तक रखने की जगह नहीं मिल रही है। इस वक्त अस्पताल में हर जगह अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिलेगा। एक ही बेड पर तीन से चार बच्चों का इलाज चल रहा है। परिजनों के लिए जगह नहीं है तो वे जमीन पर लेटे हुए हैं। माताएं अपनी नन्हीं जान के लिए बिलख रही हैं। जगह-जगह गंदगी और सबसे मुख्य बात, 100 से ज्यादा मरीजों के लिए सिर्फ तीन डॉक्टर उपलब्ध हैं।

डॉक्टरों की कमी से हालात बदतर
अस्पताल में डॉक्टरों की कमी, जरूरी दवाओं की अनुपलब्धता, बेड और नर्सिंग स्टाफ की कमी से हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। एसकेएमसीएच समेत राज्य सरकार द्वारा संचालित अस्पताल इस दिक्कत से जूझ रहे हैं। एसकेएमसीएच के सुपरिंटेंडेंट डॉ. एसके साही का कहना है कि एईएस के मरीजों के इलाज के लिए विभाग को अब तक कोई अतिरिक्त फंड नहीं मुहैया कराया गया है। वह कहते हैं, ‘मरीजों की बाढ़ से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं।’

स्वास्थ्य केंद्रों का हाल
इसके अलावा कई मरीज के परिवारों ने शिकायत की है कि रात के वक्त अस्पताल में डॉक्टर नहीं रहते हैं। सोमवार को एक बच्ची के पिता ने कहा था कि रात 12 बजे से डॉक्टर अस्पताल में दिखाई नहीं देते। इस दौरान मरीजों को नर्सों के हवाले छोड़ दिया जाता है। ज्यादातर मामलों में सबसे पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) पर बच्चों को इलाज के लिए लाया जाता है लेकिन यहां एईएस के मामलों से निपटने के लिए इंतजाम नाकाफी हैं। ज्यादातर पीएचसी में ग्लूकोमीटर नहीं है, जिससे कि पीड़ित बच्चे के शरीर में ग्लूकोज का स्तर मापा जाता है। जब तक मामला एसकेएमसीएच रिफर किया जाता है हालत बिगड़ जाती है।

बारिश की दुआ कर रहा स्वास्थ्य विभाग

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि वह अपनी क्षमता से अधिक काम कर रहा है। डॉ. एसके साही का कहना है, ‘भले ही एक बेड पर दो मरीज रखे जा रहे हैं लेकिन हम लगातार उनका इलाज कर रहे हैं।’ सुनील ने माना कि अस्पताल में संसाधनों की कमी है। बेड भी कम हैं जिसे सरकार को संज्ञान में लेना चाहिए। एहतियात बरतने के मामले में लापरवाही सामने आई है। मसलन महामारी हर साल आती है, फिर भी मेडिकल कॉलेज से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में अलग से तैयारी नहीं की गई। मेडिकल कॉलेज में मरीजों के बेड तक कम पड़ गए। स्वास्थ्य विभाग अब बारिश के लिए दुआ कर रहा है।

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सांसद ने भी माना- संसाधन की कमी
यही नहीं मुजफ्फरपुर के सांसद अजय निषाद ने भी माना कि बीमारी पर काबू पाने के लिए संसाधनों की बेहद कमी है। उन्होने कहा, ‘आईसीयू की संख्या को बढ़ाने की जरूरत है। एक ही बेड पर 1 से लेकर 3 बच्चों का इलाज चल रहा है। इससे संसाधनों की कमी का पता चलता है। अगर हम इस पर काम करें तो अगले साल तक स्थिति नियंत्रण में आ जाएगी।’ उन्होंने आगे कहा, ‘डॉक्टरों की कमी है, लेकिन इस पर काम किया जा रहा है। ऐसा भी नहीं है कि यहां इलाज के लिए आ रहे हर एक मरीज की मौत हो जा रही है। 70 प्रतिशत लोग सही हो जा रहे हैं। हालांकि यहां एक भी मौत नहीं होनी चाहिए थी। विज्ञान ने इतनी तरक्की कर ली है, लेकिन हम एक बीमारी को कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।’

बेडों की संख्या 2500 करने का फैसला

इन्सेफलाइटिस को लेकर सीएम नीतीश कुमार की अधिकारियों के साथ बैठक में एचकेएमसीएच में बिस्तरों की संख्या बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। बिहार के मुख्य सचिव दीपक कुमार के अनुसार, एसकेएमसीएच में बेडों की संख्या बढ़ाने का फैसला लिया गया है। फिलहाल इस समय बेड की संख्या 610 है जिसे बढ़ाकर 2500 करने की योजना है। अगले एक साल में बेडों की संख्या 1500 तक कर ली जाएगी। इसके बाद 2500 का लक्ष्य पूरा किया जाएगा। इसी के साथ 100 बेड वाला आईसीयू भी बनवाया जाएगा। अभी अस्पताल 50 बेड वाला आईसीयू है। इसी के साथ अस्पताल के पास धर्मशाला भी बनवाई जाएगी जहां रिश्तेदार और परिवार रुक सकेंगे।

2014 में भी हर्षवर्धन ने कही थी बेड बढ़ाने की बात

दो दिन पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने भी बाल रोग विभाग के लिए 100 बेड वाली नई बिल्डिंग के जल्द निर्माण की बात कही थी। हर्षवर्धन 5 साल भी मुजफ्फरपुर दौरे पर आए थे और तब भी उन्होंने यही बातें दोहराई थीं। 2014 में 20 से 22 जून तक हर्षवर्धन मुजफ्फरपुर के दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने कहा था कि 100 फीसदी टीकाकरण होना चाहिए, यानी कोई भी बच्चा टीकाकरण से नहीं छूटना चाहिए। उन्होंने कहा था कि जल्द ही मुजफ्फरपुर में 100 बेड वाला बच्चों का अस्पताल बनाया जाएगा। हालांकि इसके कुछ समय बाद उन्हें स्वास्थ्य मंत्री पद से हटाकर जेपी नड्डा को मंत्रालय सौंप दिया गया था लेकिन इन पांच सालों में स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से इस पर काम नहीं हुआ।

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